
Intel / Context
Brief
"Anaadi" explores the complex and often strained relationship between a father and son, delving into themes of parental expectations, academic pressure, and the tragic consequences of miscommunication, all while grappling with feelings of inadequacy and rebellion.
Written By
Seedhe Maut
Lyrics / Hindi
Sez on the beat boy
मैं सहूँ नी (नहीं) नखरे (कभी नहीं)
खाले जो (खाले) परोसा जाए (Yeah)
खाएगा (सर पे) टप्पे
याद रख जो पढ़ाया जाए (Anh)
मत सुन (मत सुन) बाप की (हाँ)
वो बोले जो (जो भी) भूल जा
Tiffin packed है
हुई देर, school जा
छूटी bus
पता लगा घर पे तो टूटी गांड (Shit)
अच्छा है करा नी था homework
अनाड़ी बोले मुझे मैं नी बुरा मानता
कहीं भी ना लगे दिल
कम है दोस्त
अकेला
घर का ना घाट का
नम है रोज़
आँख
एक ही खून
एक ही नाम
एक ही छत
एक ही जान
क्यूँ दो गाली फिर
मुझे रोज़ आप
बाप से
बनी नी कभी मैं रहा ज़्यादातर चुप
माँ भोली है बोली बेटा तू बात हर दुख
मुझे मार नी खानी उन्हें नाक नी कटवानी
तो मैं चुपचाप पढ़ू करूँ याद हर book
मेरे marks जैसे कम मेरे नाटक नी
घरवाले छोड़ मेरे तंग अध्यापक भी
खिलालो जितना भी Field पे पकड़ूँगा catches पर पढ़ाई में करता मैं catch up नी
इसीलिए गाली सुनूँ मैं शायद avoid है मेरा तरीक़ा चाहते भला सब हैं पर
जानना चाहता कोई नी मैं कैसा हूँ नी सोचा मैं चाहता जो वो तुच्छ है तो काश होता
मैं topper
तो नाम भी होता रौशन और आप लगाते गले भी माँ बनाती spaghetti हाथ
उठाते मेरे पे देने के लिए शाबाशी कैसे करूँ सब achieve वैसे ही लगे सब
अजीब राह दिखाता कोई नी मैं नी जारा घर अभी ना
मैं सहूँ नी (नहीं) नखरे (कभी नहीं)
खाले जो (खाले) परोसा जाए (Yeah)
खाएगा (सर पे) टप्पे
याद रख जो पढ़ाया जाए (Anh)
मत सुन (मत सुन) बाप की (हाँ)
वो बोले जो (जो भी) भूल जा
Tiffin packed है
हुई देर, school जा
बेटा तेरी माँ को लगता ही है मैं जल्लाद हूँ
हैना?
झूठ मत कहना
मुझे पता है तू भी वही सोचता है
(बाप-बाप) बाप बस खाली गल बोलता है
बाप खाली गालियाँ छोड़ता है
बाप के मिज़ाज में कठोरता है
लेकिन ये बाप बस तेरे बारे में ही सोच रहा है
तभी तो तुझे पढ़ने को बोलता है, बोलता हूँ
माना मेरे भी हैं सपने अधूरे
जो मैं तुझमें खोजता हूँ
अपने ही बीज में एक और बीज बोता हूँ
लेकिन तेरा भला सोचरा हूँ
हूँ मैं पिता, यानी हूँ मैं तेरा रक्षक
ना कि कोई श्रोता हूँ
Rohan मिला office में आज
आया लेके अपने लड़के को साथ
Vo bola mujhe “chachu aaya class me mai first aaj”
Maine bola “first class”
“Aur?”
और दिया सर पे हाथ फेर
भीतर दिल के लोट रहे साँप थे
घर का ना घाट का तू काहे का श्राप है
Halfday से आ रहा था घर को वापसी
Tabhi aaya phone “kya aap veer ke baap hai?”
“Hanji?!”
“Hum bol rahe hai thaane 4 se”
“NH7 ke ek car haadse me aapke ladke ki hogai maut hai, khed hai”
मैं सहूँ नी नखरे
खाले जो परोसा जाए
खाएगा टप्पे
याद रख जो पढ़ाया जाए
मत सुन बाप की
वो बोले जो भूल जा
Tiffin packed है
हुई देर, school जा
मैं सहूँ नी नखरे
खाले जो परोसा जाए
खाएगा टप्पे
याद रख जो पढ़ाया जाए
मत सुन बाप की
वो बोले जो भूल जा
Tiffin packed है
हुई देर, school जा
Battle Reports
Intel / Context
Brief
"Anaadi" explores the complex and often strained relationship between a father and son, delving into themes of parental expectations, academic pressure, and the tragic consequences of miscommunication, all while grappling with feelings of inadequacy and rebellion.
Written By
Seedhe Maut