
Intel / Context
Brief
"Kavi" reflects on the artist's identity and struggles with self-expression and external expectations. The lyrics delve into feelings of inadequacy and the pressure to conform, questioning their role and purpose as a poet (Kavi).
Written By
Seedhe Maut
Lyrics / Hindi
समझा क्या तू, जो— (Hmh!)
समझा क्या तू, जो मैंने लिखा? (जो मैंने लिखा)
तो फिर बता (बोल!), मैं केह रहा हूँ क्या?
सुना क्या तू, जो मैंने कहा? (Huh!)
समझा क्या तू, कवि केह रहा है क्या? (Shit!)
पढ़ा ना तू जो, वो है मेरी ज़बान (मेरी ज़बान)
तो फिर बता, कवि केह रहा है क्या?
खुदको घसीटा कोने तक, अब खाए है असमंजस
नही पता के पाले में मेरे कुआं या खाई
है पर उम्मीद है कि पक्का होनी ही है चढ़ाई
इतना तो क्रूर ना होगा ऊपरवाला, की है मेहनत
माँ बोली, "चल चुप कर, सोजा" (Aanh!)
ना माँ, ना कर फ़िक्र, नहीं-नहीं
रखूं खुद का जिगर सही-सही
जगा कभी बुरी जगह होगा ज़िक्र नहीं
झूठ कहा, ज़िक्र होगा हर कहीं
जाके ढूंढ दवा लेकिन अर्थ नहीं
है किसीने ख़ूब कहा
"जहाँ होता दर्द नहीं, वहाँ पे है दर्द, दवा"
चाहा कहना मैंने तुझसे है ये कित्ती मर्तबा
सुना क्या तू, जो मैंने कहा? (Huh!)
समझा क्या तू, कवि केह रहा है क्या?
पढ़ा ना तू जो, वो है मेरी ज़बान (मेरी ज़बान)
तो फिर बता, कवि केह रहा है क्या?
हाँ, शुरू से हम दोष दें पैसे को बस
मैं मांगूं कुछ, वो कोसते खुद ही को तब
था कर्ज़ पर वो बोलते "नहीं" कभी नहीं
अचानक आ गए road पे गवाके सब
Unlucky थे कि दोस्त भी चालाक हैं
जो थे वो सारे लोमड़ी बराबर
पर क्या फायदा रख के दोस्ती बनाकर
जब ये भोसड़ी-के भागे जब हो गोद में एक आफ़त?
अबे, छोड़ दो ये नाटक
हमारे बीच हुआ कुछ गलत
है दूरी ज़्यादा चारों के बीच
मैं घिसूँ गांड ताकि आगे जाके सारे हो ठीक
यहाँ रखूँ खाना लाके table पे, नही मांगूं मैं भीख
ऐसी मानसिक दशा
हूँ hero माँ की आँखों में, मैं Paan Singh चाचा
यहाँ free में मिले सबक (सबक)
लेके छापे सभी रकम (रकम)
पर अमीर होके क्या फ़ायदा, जब कोई साथ नही?
समझा क्या तू, जो मैंने कहा? (जो मैंने कहा) (Huh!)
समझा क्या तू, कवि केह रहा है क्या? (Shit!) (Woo)
पढ़ा ना तू (पढ़ा ना तू) जो, वो है मेरी ज़बान (वो है मेरी ज़बान)
तो फिर बता, कवि केह रहा है क्या?
Battle Reports
Intel / Context
Brief
"Kavi" reflects on the artist's identity and struggles with self-expression and external expectations. The lyrics delve into feelings of inadequacy and the pressure to conform, questioning their role and purpose as a poet (Kavi).
Written By
Seedhe Maut