2 Ka Pahada - EP
Track

Keh Chuka, Pt. 1

Intel / Context

Brief

"Keh Chuka, Pt. 1" delves into the protagonist's internal turmoil, detailing feelings of betrayal, isolation, and disillusionment with life. The song portrays a character burdened by past traumas and present suffering, leading him to withdraw from the world and question his future.

Type
Track
Vibe
Introspective

Lyrics / Hindi

ENCORE ABJ

जबान पे थी गालियां, दिमाग में ज़हरीले ख़यालात थे

अतीत के यादों ने बांधी बेड़ियां, थी उसके आज पे

वो थक चुका था रात पे जाग के

पूरी रात अंधेरो को ताग के

टूटे उन जज़्बातो की हवालात में झाँक के

सब कहते थे कि वो लोगो से दूर है भाग रहा

पर वो थक चुका था अपने आपसे भाग के

वो सांस ले तो दर्द होता था छाती में सुन्न

था दिमाग। शराब में धुत सुध खोके अपनी वो बुध खड़ा था

ज़िन्दगी की कड़वी सच्चाई वो ख़ुद पढ़ा था

ना ही था माँ का प्यार, ना बाप का साथ

ऊपर से आधे दोस्त आस्तीन का सांप थे

जिसके लिए वो घुट घुट के जिया

वो साला प्यार उसमें छुरी देके चैन की सांस ले

ऐसे में कैसे ज़माना अनजाना ना लागे

ऐसे में कैसे लाज़मी होना घबराना ना लागे

जब सारे छोड़े उसका साथ, वादे करने के बाद

तो फिर कैसे उसे सबकुछ एक दिखावा ना लागे

ऐसे में कैसे ज़िन्दगी उसे तराना सा लागे

वो किसी से ना मिलने का अब एक बहाना सा करे

क्योंकि वो डरता था के वो कल को नर्क में जाएगा

शैतान का चेहरा उसे जाना पहचाना ना लागे

कहना था, जितना हाँ अब मैं कह चुका!

सहना था, जितना हाँ अब मैं सह चुका!

कहना था!

To be continued...

Battle Reports

ENCORE
218
Words
26
Bars
130
Vocab
26
Flow Streak