
Intel / Context
Brief
"Rajdhani" is a complex love letter to Delhi, exploring both its harsh realities and the deep sense of belonging it instills. The song reflects on the artists' personal journeys, from childhood struggles to finding their place in the city's vibrant underbelly, while also critiquing its socio-political issues.
Written By
Seedhe Maut
Lyrics / Hindi
राजधानी राजधानी
पैदा हुआ तुझसे
ज़िंदगी तुझमें बिताई
घर पे माँ बहन पर ज़बान पे बहन की और माँ की
Fuck it..
राजधानी राजधानी
96 के खत्ते पे है ले रहे समाधि
कुछ बच्चे जो चरम गरीबी और कूड़े से वाक़िफ़
एक कचड़े के पहाड़ में लोहा बीनने से श्रापित
तो पकाके चूहे खाने में उन्हें शरम नहीं आती
जब सताती भूक और पीने को मिले बस काला पानी
है ये बातें नी बनावटी मनघड़त इत्यादि
बूचड़खाना बन रहा है तो हड़ताल पे है माजी
यहाँ बदबू है ज़हरीली plastic और कटे मास की पर किसको पड़े फ़र्क, देख क्या
हालात की है जमना की
जमनापारी नस्ल तेरी अक्ल में नी आती तो तू घूम जितनी दिल्ली तू दिल्ली जाने ना आधी
राजधानी राजधानी
इंक़लाब है ज़िंदा तो अमर रहे सदा ही
वो जो हो चुके शहीद खाके गोली या फाँसी
फ़ख़्र से ताकि तू चख सके आज़ादी
पर तू बन चुकी है धर्म और राजनीति की जागीर
वहाँ पे चलती नी मोहब्बत जहाँ पे चलती है लाठी
मरते हिंदू मरते मुसलमान मरती तेरी संतान ही
पर तेरको पड़े नी फ़र्क तू खाती नमक है सरकारी
हैना
राजधानी राजधानी
मैं बोलू सच तो कह देगी मुझको
आतंकवादी
पर तू भरले चाहे जिसके मर्ज़ी कान
तुझको है प्रणाम
पर रहेगा इस ज़बान पे जय जवान और जय किसान
राजधानी राजधानी
100 सवाल है लेकिन तेरपे है एक भी जवाब नी
पैदा हुआ तुझसे ज़िंदगी तुझमें बिताई
सीखा जोभी सीखा है तुझसे
तो हूँ तेरे जितना खूँखार भी..
ओये कहाँ जारी?
हैं कहाँ जारी (यही है क्या)
मुझे जानती नी? क्या जानता नी? (जानता नी के)
यही है
(ओये, ओये! वोही है वोही है पकड़ा उसे)
ओये राजधानी ओये राजधानी!! (ओये, ओये, ओये)
ओये राजधानी ओये राजधानी!! (ओये राजधानी ओये राजधानी)
ओये राजधानी ओये राजधानी!! (पकड़ इसे पकड़ पकड़ पकड़)
ओये राजधानी ओये राजधानी!!
राजधानी राजधानी
बाप चाँदनी चौक से और माँ पहाड़ी
घूमा मेने काफ़ी फ़रीदाबाद से भिवानी
नैनी तक हैं रखे नाते
पर ये गाड़ी रुकी वापस आकर
कहाँ
“कित्त है भाई”
राजधानी राजधानी
चाचा Turkman Gate की सुनाते थे कहानी
बस आता था यहाँ दादा से मिलने अब दादा यहाँ नहीं
तो सबने बेचा घर जैसे ही चिता जली वो
शानी गाँड हैं सब
क्या परिवार है fuck
मैं वापस आया दिल्ली लेकिन रिश्ते नाते सब ख़त्म अब
ना भरे ज़ख़्म मेरी बला से तो मारें सब
वूऊ
जल्दे मारें सब
S है यार chill मार थोड़ा
Calm fuck ज़्यादा intense हो गया my bad
वूऊ
राजधानी राजधानी
रिक्शा वाले भाइयों के साथ ही चिलम मारी
रोहिणी के आधे खोखों पे थी उधारी
टट्टी clubs में promoter था किसी से नी बिगाड़ी
सीखा game
धीरे धीरे कदम आगे बढ़े पता चला how to make it rain
जीते जैसे कदम आधे (हरयाणवी) रखे था नी कोई भी level पे भी same
ख़ुश हूँ मेने गुस्सा टेपा गानों में नी रखा ख़ुद ही तक ये pain
ठहरे हवा में तो लगे कि दिल्ली दूर नहीं
अब दिल्ली दूर नहीं
राजधानी राजधानी
तूने ज़िंदगी दी दूसरी दिल से हूँ आभारी
कितनी रातें छत ताम्प के लिखते हुए गुज़ारी
कितनी बातें सोच काम्प गया कागज़ तक नहीं उतारी बैठते थे सातवीं मंज़िल पे जब
तक हो जाती थी सुबह नहीं पेट है भरा बस धुएँ से धुएँ में कटी जवानी बचपन
कटा उन्हें रोते देख दौलत ही थी बरबादी
याद है भाई और मैं थे छोटे से लड़े जब खाना था नहीं
अब जब बैठते दोनों भाई साथ मंगवाते बस महँगी शराब ही ख़ुश हैं कि
तीन हैं घर अभी भाइयों के शौक़ हैं नवाबी
यहाँ से गए जब हमारे लिए यहाँ थी जगह नहीं
निकले दिल्ली से पर अंदर से दिल्ली निकली नी ज़रा भी
राजधानी
ओये कहाँ जारी?
हैं कहाँ जारी (यही है क्या)
मुझे जानती नी? क्या जानता नी? (जानता नी के)
यही है
(ओये, ओये! वोही है वोही है पकड़ा उसे)
ओये राजधानी ओये राजधानी!! (ओये, ओये, ओये)
ओये राजधानी ओये राजधानी!! (ओये राजधानी ओये राजधानी)
ओये राजधानी ओये राजधानी!! (पकड़ इसे पकड़ पकड़ पकड़)
ओये राजधानी ओये राजधानी!!
Sez on the beat boy
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"Rajdhani" is a complex love letter to Delhi, exploring both its harsh realities and the deep sense of belonging it instills. The song reflects on the artists' personal journeys, from childhood struggles to finding their place in the city's vibrant underbelly, while also critiquing its socio-political issues.
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Seedhe Maut